10 फ़ीसदी आरक्षण की बड़ी हकीकत आई देश के सामने, सुनते ही चुप हो गए सब

वर्तमान समय में केंद्र में सत्तासीन भाजपा और मोदी सरकार देश के गरीब सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण देने के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि मोदी सरकार काफी लंबे समय से कर्ज माफी का विकल्प ढूंढ रही थी। तथा कहीं ना कहीं प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा किया गया यह ऐलान विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आता है। यही वजह है की प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा सवर्णों को 10 फ़ीसदी आरक्षण दिए जाने की नीति सफल नजर आ रही है। क्योंकि यह बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पास होने वाला है।

दरअसल राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास बहुमत नहीं है। यही वजह है कि राज्यसभा में किसी भी बिल को पास कराने के लिए उसे कांग्रेस के भरोसे रहना पड़ता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस बिल को पास कराने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने भी हरी झंडी दे दी है।

हालांकि इसी बीच सदन में एक राज्य सभा सांसद ने इस बात की मांग उठाई कि यह तो संविधान के नियमों के खिलाफ है और ऐसा कैसे किया जा सकता है? जिसके बाद एक भाजपा सांसद ने आवाज उठाने वाले राज्यसभा सांसद का पुराना सारा चिट्ठा राज्यसभा में उपराष्ट्रपति के सामने खोल कर रख दिया।

जिसके बाद विरोधी दल के नेता ने खड़े होकर कहा कि अब जब हमने आप को समर्थन दे दिया है, तो यह बहस बेवजह है। और यह आप मजबूरी में कर रहे हैं और मैं भी कर रहा हूं। क्योंकि चुनाव बहुत करीब है। जिसके बाद भाजपा सांसद ने जवाब देते हुए कहा कि नहीं यह मजबूरी में नहीं है। यह एक सराहनीय कार्य है और इसका ऐलान पिछले काफी समय से तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणापत्र में करती आई थी।

हालांकि आपको बता दें कि राज्य सभा में इस बिल का दक्षिण भारत की तमाम राजनीतिक पार्टियों ने विरोध किया है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले उनका समर्थन बेहद कम है। यही वजह है कि यह बिल बेहद जल्द पास हो जाएगा। हालांकि क्या आप गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने से संतुष्ट हैं। आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। साथ ही हमारे चैनल को फॉलो करें।

न्यूज सोर्स: एबीपी न्यूज़

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