बाप ने बेटी की पढ़ाई के लिए कि’ड’नी बे’च दी, उस बेटी ने आ’शिक के साथ मिलकर की ऐ’सी हर’क’त

हर मां बाप चाहता है कि उसके बच्चे को खुब पढाई लिखाई करे तथा दुनिया मे अपना नाम कमाए लेकिन सभी मा बाप का सपना पुरा नही होता. कुछ मां बाप का सपना अघुरा रह जाता है. लेकिन बाप कितना ही गरीब क्यो ना हो लेकिन वो कभी भी अपने औ’लाद के पढा़ने मे कोई कसर नही छोड़ता है. आज ऐसी ही गरीब ला’चार किसान के बारे मे बताने जा रहे है जिसने अपनी बेटी के लिए कुछ भी करने को तैयार था.

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भीखाराम वर्मा जोकि दुसरो की खेतो की देखरेख करता था. वो राजस्थान के जयपुर जिले के कोटपूतली तहसील का रहने वाला था. वो लोगो के यहाँ नौकरी कर अपना जिदंगी गुजर बसर करता. उसकी एक बेटी और एक बेटा था. बेटे की मौ’त पाचं साल पहले सड़क दुर्घ टना मे हो गई. जबकि बेटी जिसका नाम अलका था जिसे पढाने के लिए भीखाराम लगा तार कोशिश कर रहा था तथा बेटी का एडमिशन बीकानेर के,

मेडिकल कालेज मे हो गया. मेडिकल मे खुब सारा पैसा खर्च होता है. लेकिन एक गरीब बाप नज फिक्र नहीं की और उसे खुब पढाया. जब मेडिकल के तीसरे साल के फीस के लिए पैसे नहीं थे. तो उसने अपनी एक कि’ड’नी बेच दी ताकि उसकी बेटी डाक्टर बन जाए. लेकिन उसकी बेटी जोकि अपने ही कालेज़ के किसी स्टुडेंट के साथ प्यार मे थी और पढाई मे बहुत कम दिल लगाती थी. एक दिन अलका का,

ब्याय फ्रेडं ने उसे छोड़ दिया जिसे वो बर दाश्त नही कर सकी और अलका ने खुद को फा’सीं लगा कर जा’न दे दी. और उसने अपने ब्यायफ्रेडं नीलेश के लिए एक सुसा इड नोट भी लिखा. उसके पिता ये खबर सुनते ही सदमे मे चले गए. भीखाराम के लिए ये मानना मु’श्कि’ल हो रहा कि आ’खिर उसकी बेटी इस दुनिया मे है ही नही.

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