मोदी-शाह की लाख कोशिश के बावजूद आडवाणी को मिल रही ज़िम्मेदारी, एक ज़माने बाद मुर्झाया चेहरा खिला

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को मोदी कैबिनेट में पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाता है इसके संकेत एक बार नहीं बल्कि कई बार दिए जा चुके हैं प्रधानमंत्री मोदी जो कि आडवाणी के बेहद करीबी माने जाते थे अब उन्हें किसी भी बड़े फैसले से पहले मोदी एक बार पूछते भी नहीं है।

1. पार्टी में नज़रअंदाज़ किए जा रहे लाल कृष्ण आडवाणी

गौरतलब है कि बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापकों में से एक हैं। आडवाणी ने पीएम मोदी की कई मौकों पर मदद की है। उन्हीं की वजह से नरेंद्र मोदी गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने से बचे थे।

2. अडवाणी ने की थी मोदी की मदद

साल 2014 में लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनाए जाने पर विचार विमर्श किया जा रहा था। लेकिन जब पार्टी ने इसके लिए नरेंद्र मोदी का नाम सामने रखा तो भी उन्होंने पीएम मोदी के लिए बढ़-चढ़कर चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया।

3. गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद हैं अडवाणी

आपको बता दें कि लालकृष्ण आडवाणी गुजरात की गांधीनगर सीट से सांसद हैं। वह बीते कई सालों से इस सीट से चुनाव जीतने आए हैं। और इस साल उन्होंने पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने के बाद इस सीट से चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है।

4. अडवाणी बनाये गए आचार समिति के अध्यक्ष

अब खबर सामने आई है कि लाल कृष्ण आडवाणी को लोकसभा सदन की आचार समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। आडवाणी इससे पहले भी इसके अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं।

5. बढ़ सकती हैं बीजेपी की मुश्किलें

गौरतलब है कि लोकसभा सदन की आचार समिति संसद के सदस्यों के आचार व्यवहार संबंधी शिकायतों पर काम करती है। जरूरत पड़ने पर यह सदस्यों के नैतिक और अनैतिक अचार से जुड़े मामले में संज्ञान लेकर जांच और विचार विमर्श भी कर सकती है। माना जा रहा है कि मोदी कैबिनेट के मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती है।

आपको बता दें कि लाल कृष्ण आडवाणी बीते कुछ वक़्त से ही पार्टी से दूरी बनाये हुए हैं। वह हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में देखे गए थे।

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