अमित शाह का विवादित बयान, कहा दोबारा सत्ता में आते ही इन समुदायों को करेंगे देश से बाहर, पढ़ें पूरी खबर

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल यानी नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर विवादित बयान दिया है जिसके कारण पुरे देश में उनके बयान की निंदा की जा रही है। बीजेपी अध्यक्ष ने कहा था कि “हम देश में एनआरसी रजिस्टर लागू करेंगे। हम बौद्ध, हिंदू और सिखों को छोड़कर एक-एक घुसपैठिए को देश से बाहर करेंगे।”

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह साफ़ कर दिया है की अगर उनकी पार्टी सत्ता में दोबारा आएँगी तो तोह पुरे देश में एनआरसी (National register of Citizen) को लागू कर जिसमे सिर्फ बौद्ध, हिंदू और सिखों को छोड़कर सभी को भारत देश में घुसपैठिया करार कर दिया जायेगा और उन्हें देश से निकाला जायेगा।

अमित शाह के इस बयान के बाद पुरे देश में इसकी बड़े पैमाने पर निंदा की जा रही है घुसपैठियों को देश से भगाने का बयान देकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुरी तरह फंस गए हैं। केरल के क्रिश्चियन फोरम ने अमित शाह के बयान पर रोष जताते हुए उन्हें देश और अल्पसंख्यक समुदाय से माफी मांगने को कहा है।

फोरम ने उम्मीद जताई है कि अमित शाह और भाजपा देश और खासकर उस अल्पसंख्यक समुदाय से माफी मांगें जिन्हें उनके बयान से बुरा महसूस हुआ है। शाह ने कहा था, ‘हम हिंदुओं, बौद्धों और सिखों को छोड़कर देश से हर एक घुसपैठिए को साफ कर देंगे।’ क्रिश्चियन फोरम का मानना है कि ये बयान साफ तौर पर देश की एकता, अखंडता और और धर्मनिरपेक्ष छवि पर सीधा शाह के इस बयान पर एक तरफ क्रिश्चियम फोरम की नाराजगी समझ आ रही हैं लेकिन मुसिलम समुदाय की तरफ से कोई बयान नहीं आया है, ये अचरज का विषय हो सकता है।

आखिरकार क्यों अमित शाह ने मुस्लिम समुदाय और क्रिश्चियम समुदाय को भारतीय समाज का हिस्सा नहीं माना और चुनाव के मौके पर इस तरह का बयान देकर अमित शाह क्या पैंतरा अपना रहे हैं, ये देखने और समझने की जरूरत है। अमित शाह के द्वारा भारत देश में लगभग 15 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय के लोगो को भारत का घुसपैठिया करार दे दिया है वही मुस्लिम समुदाय के साथ साथ क्रिश्चियम समुदाय, जैन समुदाय सभी को भाजपा ने घुसपैठिया क़रार दे दिया है।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी में ही इस बिल को लेकर विरोध शुरू हो गया है। शिलॉन्ग सीट से बीजेपी प्रत्याशी सनबोर शुल्लई ने इस पर पार्टी को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा, “जब तक मैं जिंदा हूं तब तक नागरिकता संशोधन विधेयक लागू नहीं हो सकता है। “उन्होंने आगे कहा, “मैं अपनी जान दे दूंगा। पीएम नरेंद्र मोदी के सामने आत्महत्या कर लूंगा, लेकिन मैं इस विधेयक को किसी भी हालता में लागू नहीं होने दूंगा।”

भाजपा की तरफ से इस तरह के सांप्रदायिक बयान आने के कारण उन्ही के पार्टी के उनका विरोध कर रहे है अमित शाह के बयान पर तंज कसते हुए पत्रकार रवि नैयर ने कहा कि इसकी शुरुआत अमित शाह से होनी चाहिए और उनको ईरान भेज देना चाहिए।

बता दें कि पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों में इस बिल के खिलाफ विरोध जारी है। हाल ही में नागालैंड में बीजेपी के 37 सदस्यों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इन सभी सदस्यों ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में पार्टी छोड़ दिया था। राज्‍य बीजेपी प्रमुख को लिखी चिट्ठी में सदस्‍यों ने कहा था कि वे इसलिए इस्‍तीफा दे रहे हैं क्‍योंकि वे पार्टी के सिद्धांतों से इत्‍तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी ‘हिंदुत्‍व नीति’से है।

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