अर्णब गोस्वामी को मोदी सरकार ने दिया यह तोहफा, बिकाऊ मीडिया का हुआ पर्दाफ़ाश, छिड़ा विवाद

केंद्र की मोदी सरकार ने नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम और लाइब्रेरी सोसायटी में चार नए लोगों को नियुक्त किया है. नए सोसायटी सदस्यों में पत्रकार रामबहादुर राय, पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर, पत्रकार अर्णब गोस्वामी और बीजेपी सांसद विनय सहस्रबुद्धे को शामिल किया गया है.

रामबहादुर राय इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फ़ॉर आर्ट्स के भी चेयरमैन हैं और सहस्रबुद्धे इंडियन काउंसिल फ़ॉर कल्चरल रिलेशन के अध्यक्ष हैं. इन नियुक्तियों के बाद देश के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक प्रताप भानू मेहता ने इस सोसायटी से इस्तीफ़ा दे दिया है.

ये नए सदस्य 26 अप्रैल 2020 तक सोसायटी के सदस्य रह सकेंगे. प्रताप भानू मेहता ने अगस्त 2016 में ही इसके कार्यकारी परिषद से भी इस्तीफ़ा दे दिया था. मेहता नए निदेशक शक्ति सिन्हा की नियुक्ति से असहमत थे.

पीएम का विपक्ष पर झूठ बोलने का आरोप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि विपक्ष के भाषण को मनोरंजन के तौर पर लें. पीएम मोदी ने अपने विरोधियों पर आरोप लगाया कि वो झूठ की मशीन हो गए हैं और एके-47 की गति से दनादन झूठ बोल रहे हैं.

बीजेपी के बूथ कार्यकर्ताओं से मोदी ने कहा कि बीजेपी के ख़िलाफ़ अलग-अलग पार्टियों से गठबंधन होने से डरने की ज़रूरत नहीं है. प्रधानमंत्री ने कहा कि मतदाता ही विपक्ष के रवैये को ख़ारिज कर देंगे क्योंकि विपक्ष अच्छे कामों को सराह नहीं रहा है और सेना का अपमान कर रहा है.

सीबीआई प्रमुख से आलोक वर्मा के हटाए जाने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के हटाए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. खड़गे लोकसभा में कांग्रेस के नेता हैं. खड़गे ने कहा कि आलोक वर्मा को केंद्र की मोदी सरकार ने अवैध तरीक़े से हटाया है. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आलोक वर्मा का हटाया जाना अवैध और मनमानी है.

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई प्रमुख के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले तीन सदस्यीय समिति के पास मामला जाना चाहिए जो सीबीआई के निदेशक का चुनाव करती है. सीबीआई निदेश की नियुक्ति एक पैनल करता है जिसमें प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और नेता प्रतिपक्ष होते हैं.

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