चलते चुनाव के बीच ये बैरिस्टर बना मोदी सरकार का दुश्मन, फंसा दी गले में ये बड़ी हड्डी, जानें पूरा मामला

विपक्ष के बुने जाल से बड़ी सफाई से बाहर आकर ताल ठोककर विपक्षी नेताओं को देशद्रोही बताने में मशगूल मोदी सरकार को उसके ही एक बैरिस्टर ने ऐसे लफड़े में फंसा दिया है कि अब उसे ना निगलते बन रहा है और ना ही उगलते। जी हां सुप्रीम कोर्ट ने जिस राफेल डील मामले में पिछले साल मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी थी, उस पर मोदी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल की लापरवाही की वजह से फिर से सुनवाई होगी।

के के वेणुगोपाल ने राफेल डील मामले की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान रिकार्ड पर यह कह दिया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार याचिका दायर की गई है, वे गोपनीय दस्तावेज हैं और उन्हें रक्षामंत्रालय से चुराया गया है। वेणुगोपाल की दलील थी कि चोरी के दस्तावेजों को सबूत नहीं माना जा सकता, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस याचिका को खारिज करे।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले से हतोत्साहित विपक्ष को वेणुगोपाल की इस गलती से संजीवनी मिल गई और वह मोदी सरकार पर हमलावर हो गया। इससे सरकार को अब इस मामले में फिर से सुनवाई का सामना करना पड़ेगा। फिर से सुनवाई का सबसे ज्यादा असर चल रहे लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा जिसमें विपक्ष राफेल मामले को प्रमुख मुद्दे के रूप में उछाल रहा है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन पहले यह फैसला दिया है कि वह राफेल डील में गोपनीय दस्तावेजों की गलत तरीके से ली गई फोटोकापी के आधार पर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करेगा। दूसरी ओर मोदी सरकार ने यह कहकर पुनर्विचार याचिका का विरोध किया था कि जिन दस्तावेजों को याचिका का आधार बनाया जा रहा है, उन्हें कानूनन सबूत नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस आपत्ति पर 14 मार्च को फैसला सुरक्षित रख दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन दस्तावेजों के आधार पर ​पुनर्विचार याचिका की सुनवाई की जाएगी। ये दस्तावेज मोदी सरकार की नींद उड़ा देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 14 दिसम्बर को राफेल डील की प्रक्रिया में गड़बड़ी से इनकार कर दिया था।
उस समय कोर्ट ने उन याचिकाओं को भी ख़ारिज किया गया था, जो कि डील को चुनौती देने वाली थी। इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दस्तावेजों के आधार पर इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की थीं।

SHARE