मोदी लहर का हुआ खात्मा, सत्ता से बाहर होगी भाजपा सरकार, पार्टी में मचा हडकंप – देखें

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावों के मतदान हो चुके हैं। अब सभी राजनीतिक दलों की निगाहें 11 दिसंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हुई हैं। प्रदेश में कड़ा मुकाबला सत्ताधारी पक्ष भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच है। इधर किसान, सवर्ण, दलित के विरोध और एंटी इनकंबेंसी को देखते हुए भाजपा ने इस बार बहुत सोच समझकर टिकट वितरण किया। इसमें सुधार को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा ने कई मंत्री विधायकों का टिकट काटा था।

साथ ही, कईयों पर भरोसा करते हुए दौबारा मैदान में उतरने का मौका दिया था। लेकिन अब पार्टी का ये भरोसा भी टूटता हुआ नजर आ रहा है। इस बार शिवराज सरकार के कई मंत्रियों पर हार का खतरा मंडराता हुआ दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो इस बार कई सीटों के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि, कहीं भाजपा के बागियों ने इन मंत्रियों का संकट बढ़ाया है तो कहीं एंटी-इंकम्बेंसी भारी पड़ती दिख रही है।

वहीं, कांग्रेस के अलावा अन्य दलों ने भी त्रिकोणीय मुकाबला कर भाजपा के लिए संघर्ष बढ़ाया है। पिछली बार इन्हीं कारणो से करीब दस मंत्री पराजित हुए थे। इस बार भी यह अनुमान है कि, लगभग 12 मंत्रियों को इन कारणों से सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है। एक वजह और भी है और वह यह कि, इस बार का वोटर भी मौन है, जिसने भाजपा की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा रखी है। जैसे जैसे मतगणना के दिन नज़दीक आ रहे हैं, वैसे वैसे कई मंत्रियों के साथ साथ पार्टी के बड़े नेताओं के माथे पर भी चिंता की लकीरें बढञती जा रही हैं। हालांकि फैसला क्या होना है यह तो 11 दिसंबर को तय हो ही जाएगा, लेकिन इस बार भाजपा के किन दिग्गजों की साख दाव पर लगी है, इनपर ज़रा गौर कर लेते हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इन मंत्रियों की कुर्सी खतरे में नज़र आ रही है.

-जयंत मलैया

2018 में मतदान 74.34 फीसदी

पिछली बार दमोह में महज 4953 मतों से चुनाव जीतने वाले भाजपा के मंत्री जयंत मलैया इस बार त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे हुए नज़र आ रहे हैं। यहां भाजपा के बागी पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी है। कांग्रेस के प्रत्याशी राहुल लोधी ने भी लोधी वोटों को प्रभावित किया है।

-रुस्तम सिंह

2018 में मतदान 62.98 प्रतिशत

मुरैना से पिछला चुनाव महज 1700 मतों से जीतने वाले स्वास्थ मंत्री रुस्तम सिंह भी त्रिकोणीय मुकाबले के कारण खतरे में नज़र आ रहे हैं। इस बार यहां बसपा से दिमनी के विधायक बलबीर सिंह दंडोतिया और कांग्रेस के रघुराज ङ्क्षसह कंसाना उन्हें कड़ी टक्कर देते नज़र आए। बता दें कि, पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार मुरैना में तीन फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है।

-उमाशंकर गुप्ता

2018 में मतदान 62.58 प्रतिशत

राजधानी भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट से भाजपा के नेतृत्व में खड़े हुए मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने साल 2013 में 18 हजार वोटों से जीत हासिल की थी। इस बार उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता पीसी शर्मा से है जानकारों का मानना है कि, दोनो ही प्रत्याशियों में उस बार कड़ी टक्कर देखने को मिली। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के आलोक अग्रवाल ने भी मुकाबले को और भी रोचक बनाया है। हालांकि, इस सीट पर पिछली बार के मुकाबले इस बार डेढ़ फीसदी कम मतदान हुआ है।

-राजेंद्र शुक्ला

2018 में मतदान 66.13 प्रतिशत

सिलवानी विधानसभा से पिछला चुनाव 17 हजार मतों से जीते थे। उदयपुरा से लडऩा चाहते थे, लेकिन संगठन ने सीट नहीं बदली। यहां रामपाल की बहू की आत्महत्या मामले में रघुवंशी समाज में नाराजगी है। कांगे्रस के देवेंद्र पटेल व सपा के प्रदेश अध्यक्ष गौरीसिंह यादव ने मुश्किल खड़ी की है।

-भूपेंद्र सिंह

2018 में मतदान 81.25 प्रतिशत

खुरई सीट से पिछला चुनाव 6 हजार मतों से जीते थे। 2008 में भूपेंद्र को चुनाव हराने वाले कांग्रेस प्रत्याशी अरुणोदय चौबे फिर मैदान में हैं। खुरई सीट पर पिछले चुनाव की तुलना में साढ़े 5त्न मतदान बढ़ा है। तेजी से मतदान बढऩा भी चिंता का एक विषय है।

-सुरेंद्र पटवा

2018 में मतदान 77.72 प्रतिशत

भोजपुर से पिछला चुनाव 20 हजार मतों से जीते थे। पटवा के लिए यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता सुरेश पचौरी ने मुश्किल खड़ी कर रखी है। पटवा की सीट पर पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अप्रत्याशित रूप से साढ़े पांच फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है।

-जयभान सिंह पवैया

2018 में मतदान 55.05 प्रतिशत

ग्वालियर विधानसभा सीट पर पवैया 2013 के चुनाव में 15561 मतों से जीते थे। कांग्रेस के प्रद्युम्र सिंह तोमर इस बार उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। हालांकि ग्वालियर सीट पर इस बार पिछले चुनाव की तुलना में साढ़े पांच प्रतिशत कम मतदान हुआ है।

-शरद जैन

2018 में मतदान 63.79 प्रतिशत

जबलपुर उत्तर से 2013 में 33563 मतों से जीते थे। इस बार भाजपा के बागी धीरज पटेरिया व कांग्रेस के विनय सक्सेना ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। मंत्री होने के बाद भी मतदान के पहले क्षेत्र में बेकाबू हुए चिकनगुनिया व डेंगू से जनता में नाराजगी है।

-ललिता यादव

2018 में मतदान 70.08 प्रतिशत

पिछला विधानसभा चुनाव ललिता यादव ने छतरपुर से जीता था, लेकिन इस बार सीट बदलकर मलहरा पहुंचीं। यहां स्थानीय नेताओं का सहयोग नहीं मिलने के कारण स्थिति कमजोर है। यहां भाजपा के बागी सुनील घुवारा ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है।

-लालसिंह आर्य

2018 में मतदान 59.30 प्रतिशत

पिछला चुनाव गोहद विधानसभा सीट से 19814 मतों से जीते थे, लेकिन इस बार कांग्रेस प्रत्याशी रणवीर जाटव टक्कर दे रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी ने यहां से व्यापमं के आरोपी जगदीश सगर को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय कर दिया है।

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