मोदी सरकार के इस नए अध्यादेश से नोटबंदी पार्ट-2 के संकेत, व्यापारियों में बढ़ी हलचल

देश में नोटबंदी एक प्रलय की तरह थी, जिसमें कई आम लोगों की जान गई और व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ। खैर इस बात को दो साल से ज्यादा बीत चुके हैं। लेकिन सरकार के एक नए अध्यादेश ने नोटबंदी पार्ट-2 की सुगबुगाहट दी है। जिससे व्यापारियों में काफी बेचैनी बढ़ गई है। वास्तव में अनियमित जमा पर पाबंदी लगाने वाले अध्यादेश से बाजारों और छोटे कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। इस अध्यादेश से कई तरह के अनौपचारिक व्यापारिक लेन-देन आ जाएंगे।

जो सरकारी रेकॉर्ड में नहीं आते थे। वहीं अध्यादेश में वस्तु या सेवा की सप्लाई के लिए दिए गए अडवांस को अलग रखा गया है। अब भी अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट की परिभाषा पर बड़ा मतभेद है और सरकार से इसके लिए सफाई मांगी जा रही है। वास्तव में यह अध्यादेश नोटबंदी की तरह से साबित हो रहा है।

व्यापारिक संगठनों ने वित्त मंत्रालय की ओर से की यह मांग
अध्यादेश आने के बाद व्यापार संगठनों ने वित्त मंत्रालय से सेक्शन 2 (17) के तहत अनियमित जमा यानि अनरेग्युलेटेड डिपॉजिट के लिए ‘बाय द वे ऑफ बिजनस’ को और स्पष्ट करने की मांग की है। व्यापारियों की मानें तो बाजारों में बिना ब्याज के रुपया लेना आम बात है। तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यापारी मौखिक या अनौपचारिक पर्ची के माध्यम से लाखों रुपयों का लेन-देन करते हैं। कमेटियों के माध्यम से भी रुपयों को जमा किया जाता है। अब सभी तरीकों को अध्यादेश के दायरे में लाया गया है। जिनके लिए 10 साल तक कैद या 25 करोड़ तक जुर्माना रखने का प्रस्ताव है।

आखिर क्यों है घबराहट?
जानकारों की मानें तो स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में सिर्फ पब्लिक डिपॉजिट की बात कही गई थी, जबकि अध्यादेश के सेक्शन 2(6) में हर व्यक्ति, प्रॉपराइटरशिप, फर्म, एलएलपी, कंपनी, ट्रस्ट को शामिल किया गया है। जिसका असर कई तरह के लोन, अडवांस और लेन-देन पर होगा। जिसकी वजह से आम कारोबारियों में अध्यादेश को लेकर घबराहट दिखाई दे रही है। वहीं यह अध्यादेश उन डेड-एंट्रीज को रोकने में कारगर होगा जो मार्केट से पैसा उठाने के बाद उसी फिस्कल ईयर में लौटा देते हैं।

अभी इसका होना है स्पष्टीकरण
टैक्स के जानकारों के अनुसार इस अध्यादेश पर सरकार की ओर से और स्पष्टीकरण की जरुरत है। जब तक वो नहीं आ जाता तब यही मानकर चला जाए कि सरकार का मकसद सिर्फ पोंजी स्कीमों या कैश होर्डिंग को रेगुलेट करना है, न कि जेनुइन कारोबारी के लेन-देन को। सरकार चाहती है कि जो भी बिजनस के लिए पैसा दे रहा है वह उस पर ब्याज ले और टीडीएस काटे और जमा कराए। संबंधित व्यक्ति भी अपनी फाइलिंग में इसे दर्शाएगा।

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