न’बी से पह’ले ही फ़र’माया था, खड़े होकर खाने से होती है यह ब’ड़ी बी’मा’री, व’क़्त रहते सु’धर जा’एँ

आज कल की भाग दौड़ भरी ज़ि’न्द’गी व बदलते खान-पान के कारण हम लोग तरह तरह की ख’तर’नाक व जा’नले’वा बीमा’रियों की जकड़ में आते जा रहे हैं। बदलते सामा’जिक परिवेश व तेज़ी से हिं’दुस्ता’न में पांव पसारते पश्चिमी संस्कृ ति ने हमारे जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है। लेकिन यदि हम अपने खाने-पीने के तौर तरीक़ों को आख़री र’सूल हज़’रत मु’ह’म्मद मु’स्त’फ़ा स’ल्ल’ल्ला’हु अ’लै’ही व’स’ल्ल’म के मुताबिक करें तो हम इन बी’मा’रियों से छुटकारा पा सकते हैं। जैसा कि खु’दा के रसू’ल ने,

image source: google

बताया कि इ’स्ला’म मे खड़े हो कर खाने पीने से रोका गया है। कहा गया है कि खड़े हो कर खाने पीने से बी’मा’रियां पैदा होती हैं। आज जिसकी तस्दीक़ वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में की है। पश्चिमी देशों में शुरू से ही खड़े हो कर खाने पीने का कल्चर है जो आज कल भारत मे भी प्रचलित हो गया है। वै’ज्ञा’निकों का कहना है कि कैं’सर जैसी जा’नले’वा बी’मारी का एक कारण खड़े हो कर खाना पीना भी है।

रिसर्च में ये बात सामने आई है कि हमे खड़े हो कर खाने पीने से बचना चाहिए जिससे कें’सर जैसी बीमा’री से बचा जा सकता है। आज हम देखते हैं कि हम लोग बी’मा’रियों की चपेट में आ कर लाखो रुपये द’वाओं पर और डॉ’क्टर के पास खर्च कर देते हैं। जबकि हम अपने रसू’ल के बताए रास्तों को भूल बैठे हैं अगर हम अपनी जीवन शैली को रसू’ल’ल्ला’ह स’ल्ल’ल्ला’हु अ’लैही व’सल्ल’म के मुताबिक ढाल लेते हैं तो हम बोहत सारी बी’मा’रियों से बच सकते हैं।

जो बात वै’ज्ञा’निक रि’सर्च करने के बाद आज बता रहे हैं वही बात इ’स्ला’म मे हिकतम के तौर पर प्यारे न’बी स’ल्ल ल्ला’हु अ’लै’हि व’सल्ल’म ने चौदह सौ साल पहले हमें बताया दी थीं। लेकिन हम उनके बताए रास्तो को भूल बैठे हैं हम अपने खान पान के तरीक़ो को बदलना चाहिए और बैठ कर सुकून से खाना खाना चाहिए।

SHARE