इंडियन आर्मी ने म्यांमार में नहीं की क्रॉस बॉर्डर स्ट्राइक, कहा -…

भारतीय सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक के दौरान म्यांमार में भी क्रॉस बॉर्डर स्ट्राइक करने की खबर को खारिज कर दिया है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 17 फरवरी से 2 मार्च के बीच भारत-म्यांमार सीमा पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी लेकिन सीमा पार जाकर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जवानों की संख्या बढ़ाने का मकसद कलादान प्रोजेक्ट को सुरक्षा देकर उसकी रफ्तार बढ़ाना है

म्यांमार में कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। 48 करोड़ डॉलर के इस प्रोजेक्ट की फंडिंग भारत सरकार कर रही है। इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत और म्यांमार के बीच जल-थल मार्गों से संपर्क बढ़ाना है। इसके 2020 तक पूरा होने की उम्मीद है। यहां पर भारतीय जवानों को म्यांमार के बागियों की तरफ से धमकियां मिलने और पैसे लूटने का मामला सामना आया था। म्यांमार की सेना ने इन बागियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

इसके साथ-साथ भारत ने भी सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी थी। म्यांमार सीमा पर तैनात जवानों में खासतौर से असम राइफल्स के हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों ने कहा, ‘भारत-म्यांमार राजनयिक स्तर पर संर्पक में थे और दोनों की सेनाएं कई योजनाओं पर काम कर रही हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि क्रॉस बॉर्डर स्ट्राइक की जा रही है जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है। हमारा मुख्य मकसद अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करने वालों पर लगाम कसना है।’

सेना ने कहा, ‘म्यांमार के साथ भारत की आपसी समझ काफी अच्छी है। ऐसे में हमें क्रॉस बॉर्डर कार्रवाई की कोई जरुरत नहीं है। जब भी हमने म्यांमार सेना से कुछ कहा है उन्होंने हमारी बात मानी है। लेकिन म्यांमार के बागी लोग समस्याएं पैदा करते हैं। इसलिए वहां की आर्मी की मांग पर हमने 2017 में 8-10 लोगों को पकड़ा था और पांच को मार गिराया।’ दोनों देशों के बीच संपर्क मजबूत करने और बागियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए भारत ने म्यांमार के साथ रेडियो सेट भी शेयर किए हैं।

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