एह’राम सिर्फ लिबा’स नहीं है, इ’स्लाम की सब’से बुनि’यादी बात सम’झना ज़’रूरी है, चाहे कोई हो

इस वक़्त सऊदी अरब से हाजियों की तमाम तस्वीरें सामने आ रही है, जिसमे वह एहराम पहने हुए नज़र आ रहे हैं. हालाँकि दुनिया वालों की नज़र में यह महज़ एक आम कपडा होगा जो मु’स्लिम पहनते हैं लेकिन आज हम आपको इस कपडे को लेकर एक नया नजरिया बताने जा रहे हैं. यह महज़ लिबास नहीं है बल्कि ये तकब्बुर यानी कि अहंकार को पस्त करने का सबसे बढ़िया तरीका है. आइए बताते हैं कि आखिर,

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हम इसके बारे में ऐसा क्यों कह रहे हैं. आपको याद होगा कि सुपर स्टार आमिर खान जब अपनी अम्मी के साथ हज करने गए हुए थे तो उन्होंने भी यह पहना हुआ था. उनकी तस्वीर मौजूद है. ऐसे में जब ऐसे शख्स ने यह पहना हुआ है तो इसके साथ साथ एक मामूली सा भारतीय आदमी भी यही पहनेगा. चाहे पाक के पीएम इमरान खान भी जाए तो भी यही पहनेंगे और उन्हें भी ऐसा करते देखा गया है या,

फिर सोमालिया का आदिवासी को भी यही एहराम पहनने पड़ेगा. इसके अलावा आपको याद होगा कि दुनिया के सबसे महंगे फुटबालर पाल बाग्बा ने भी यही पहना था और विश्व चैम्पियन रहे मोहम्मद अली ने भी एहराम पहना था. ऐसे में समझने वाली बात है कि चाहे दुनिया का कोई भी कितना बड़ा अमीर शख्स हो या फिर हो ताक’त वर. वह जब यहाँ आएगा तो यही लिबास पहनेगा और बराबर की सफ मे खड़ा होगा.

ऐसे में आपको याद रखना चाहिए कि इ’स्लाम में किसी अरबी को किसी अजमी पर या फिर किसी अमीर को किसी भी गरीब पर या फिर किसी गोर को किसी काले पर कोई फौकियत नहीं है. इ’स्लाम और खु’दा की नज़र में सभी बराबर हैं, ऐसे में बराबरी का सबसे बड़ा पैरोकार इ’स्लाम है और जो आज लोग इसे लेकर तमाम तरह की बातें कह रहे हैं उन्हें इसके बारे में ज़रा भी इल्म नहीं है.

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