सैनिकों को भी बर्बाद कर दिया मोदी सरकार ने, नए फ़रमान से सेना भी परेशान

भारत की जनता एक ओर कमरतोड़ महंगाई से जूझ रही तो दूसरी ओर करोड़ों बेरोजगार सरकार की ओर रोजगार और काम धंधे के लिए टकटकी भरी निगाहों से देख रहे हैं. बेरोजगारों के लिए भारत सरकार की ओर से बेहद बुरी खबर आई है जो उनके उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है.

1. चल रही है थल सेना की बैठक

थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत वरीय अधिकारियों के साथ दिल्ली में बैठक कर रहे हैं जिसका प्रमुख एजेंडा है भारतीय थल सेना यानी इंडियन आर्मी के साइज को थोड़ा छोटा करना. फिलहाल भारतीय थल सेना की क्षमता 12.6 लाख है. सेना प्रमुख का मानना है कि इतनी बड़ी सेना होने की वजह से रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.

2. संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल

आर्मी चीफ जनरल विपिन रावत का मानना है कि जितना रक्षा बजट भारत सरकार बनाती है, उसका 83 फीसदी हिस्सा सैनिकों की सैलरी में खर्च हो जाता है. बाकी बचे 17 फीसदी पैसों से सैन्य साजों सामान खरीदे जाते हैं जो कहीं से हीं पर्याप्त नहीं हो पाता है.

3. स्टडी ग्रुप का हुआ गठन

आर्मी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इंडियन आर्मी ने अपने पुनर्गठन के लिए चार अलग अलग स्टडी ग्रुप बनाया है. इन सभी ग्रुप्स के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी होंगें. इनका काम होगा कि सेना की फील्ड फॉर्मेशन, सेना मुख्यालय, कैडर रिव्यू और जेसीओ रैंक के सैनिकों के काम करने के तरीकों की समीक्षा करेगी.

4. बहुत कम हीं होती है ऐसी मीटिंग

आर्मी के इतिहास में ऐसा कम हीं देखने को मिला है कि आर्मी चीफ सातों कमांड के अधिकारियों के साथ एक साथ ऐसी बैठक करते हो लेकिन यहां आर्मी को नया स्वरुप देने के लिए मैराथन बैठक चल रही है. आर्मी के पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य सैनिकों की संख्या में डेढ़ लाख की कटौती कर उनकी सैलरी के पैसे से नए हथियार खरीदे जाएं.

सेना के कामकाज के तरीके पर टिप्पणी उचित नहीं है लेकिन कहीं सैनिकों की संख्या में कटौती नोटबंदी की तरह घातक साबित न हो जाए, इसका ध्यान रखना जरुरी है.

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