राम जन्मभूमि: CJI गोगोई का ऐतिहासिक कदम, तीन जजों की बेंच के फैसले को पलटा – देखें

भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई का राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले में संवैधानिक पीठ बनाने का फैसला काफी चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि एक तो ये अपनी तरह का पहला फैसला है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब मुख्‍य न्‍यायाधीश के प्रशासनिक आदेश पर एक संवैधानिक पीठ का गठन हुआ है और इसके लिए न तो किसी छोटी बेंच ने सलाह दी और न ही ऐसे सवाल सामने आए जिससे कि इस तरह की बेंच की जरूरत महसूस हो।

जस्टिस गोगोई का आदेश इसलिए भी अनूठा है, क्‍योंकि इसी मामले में तीन जजों की बेंच के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें संवैधानिक पीठ की मांग को खारिज किया गया था। सुप्रीम कोर्ट रजिस्‍ट्री ने मंगलवार शाम को एक नोटिस जारी किया.

इसमें कहा गया कि राम जन्‍मभूमि मामले की सुनवाई 10 जनवरी से पांच जजों की संवैधानिक पीठ करेगी। इस पीठ में मुख्‍य न्‍यायाधीश गोगोई, जस्टिस एस बोबडे, एनवी रमना, उदय यू ललित और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल होंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल सितंबर में तीन जजों की बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले को संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की कोई जरूरत नहीं है। 2-1 के फैसले में कहा गया था कि इस मामले को पूरी तरह से जमीन विवाद की तरह सुना जाएगा।

सी प्रकार से यह मामला मुख्‍य न्‍यायाधीश गोगोई की अध्‍यक्षता वाली बेंच के सामने दो बार आया था। सुप्रीम कोर्ट के नियम 2013 के तहत मुख्‍य न्‍यायाधीश के पास यह अधिकार होता है कि वह किसी भी मामले, अपील की सुनवाई के लिए दो या इससे ज्‍यादा जजों की बेंच बना सकते हैं।

ये भी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की हैंडबुक में भी यह कहा गया है कि किसी भी मामले की सुनवाई के लिए पांच या इससे ज्‍यादा जजों की बेंच बनाने का अधिकार चीफ जस्टिस के पास होता है, लेकिन अभी तक किसी मुख्‍य न्‍यायाधीश ने अपनी ताकत का इस तरह से उपयोग नहीं किया था जबकि संवैधानिक पीठ की मांग को ठुकरा दिया गया हो।

SHARE