इन समीकरणों से राजस्थान में भाजपा का होगा सूपड़ा साफ़, मोदी-शाह सदमे में – देखें

आयोग ने राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है। राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को मतदान होगा। हांलाकि भाजपा इस राज्य में दोबारा सत्ता में लौटने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन वसुंधरा राजे को यहां के एक खास ट्रेंड से मुकाबला करना पड़ रहा है। राजस्थानी जनता का यह ट्रेंड पिछले साल 20 साल से निर्णायक बना हुआ है। बीजेपी ने राजस्थान में 180 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है, अब देखना होगा कि उसका यह लक्ष्य पूरा हो पाता है अथवा नहीं।

राजस्थान की जनता का खास ट्रेंड

1998 से ही लगातार हर पांच साल बाद इस राज्य की सरकार बदल जाती है। यानि पिछले 20 साल से कोई भी सरकार सत्ता में दोबारा वापसी नहीं कर सकी है। इस खास ट्रेंड को तोड़ना वसुंधरा राजे के लिए सबसे बड़ी चुनाती मानी जा रही है।

1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद 2003 के चुनाव में बीजेपी ने 120 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की तथा वसुंधरा राजे पहली बार इस राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। 2008 में एक बार फिर से उन्हें अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ा और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने।

साल 2013 में एक बार फिर से वहीं पुराना ट्रेंड देखने को मिला और बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई तथा वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुईं। बता दें कि एक बार फिर से 5 साल बाद यानि 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में वहीं पुराना ट्रेंड वसुंधरा राजे की सत्ता वापसी में बड़ी बाधा बन रहा है।

गौरतलब है कि सत्ता वापसी के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पिछले दो माह तक राजस्थान गौरव यात्रा पर रहीं। उन्होंने कई रैलियों के माध्यम से जनसंवाद स्थापित किया। वसुंधरा राजे ने कौशल यौजना, स्वास्थ्य बीमा योजना, अन्नपूर्णा भंडारा और भामाशाह योजना का जिक्र अपनी हर चुनावी रैली विशेष रूप से किया। पिछले साल आनंदपाल एनकाउंटर के बाद बीजेपी का परंपरागत वोट माना जाने वाला राजपूत समुदाय नाराज बताया जा रहा है।

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