मोदी सरकार और CBI के रिश्तों की खुली पोल, कोर्ट ने लगाई फटकार – देखें

सीबीआई विवाद के बाद अंतरिम निदेशक बनाए गए नागेश्वर राव को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में सजा सुनायी है। कोर्ट ने नागेश्वर राव को सजा के तौर पर कोर्ट में कोने में जाकर बैठने और एक हफ्ते के अंदर 1 लाख रुपए बतौर जुर्माना कोर्ट में जमा कराने का आदेश दिया है। बता दें कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस में सुप्रीम कोर्ट ने मामले के जांच अधिकारी और सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार के तबादले पर रोक लगायी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद नागेश्वर राव ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक रहते हुए अरुण कुमार का तबादला कर दिया था।

जिसे कोर्ट ने अपने आदेश की अवमानना माना और सजा के तौर पर नागेश्वर राव को यह सजा दी। सुप्रीम कोर्ट ने नागेश्वर राव के साथ-साथ सीबीआई के कानूनी सलाहकार को भी उपरोक्त सजा का आदेश दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से सजा पाने वाले नागेश्वर राव पहले सीबीआई अधिकारी हैं।

इससे पहले नागेश्वर राव ने कोर्ट की अवमानना के इस मामले में कोर्ट में सशर्त माफी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने माफी को अस्वीकार करते हुए नागेश्वर राव को सजा का ऐलान कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में नागेश्वर राव और सीबीआई के कानूनी सलाहकार का पक्ष अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने रखा।

अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट में बताया कि इस मामले में नागेश्वर राव की गलती नहीं है, ब्लकि गलती सीबीआई के जूनियर वकीलों की है, जिन्होंने कोर्ट को इस संबंध में सूचित करने में लापरवाही बरती। लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई केके वेणुगोपाल के तर्कों से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने कोर्ट की अवमानना के मामले में सीबीआई के पूर्व अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सजा का ऐलान कर दिया।

सजा का ऐलान करते हुए सीजीआई ने कहा कि कोर्ट के चलने तक आप कोर्ट में एक कोने में बैठे रहेंगे और एक हफ्ते में जुर्माने के तौर पर 1 लाख रुपए जमा करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस के जांच अधिकारी रहे एके शर्मा के वापस मामले की जांच सौंपने से इंकार कर दिया।

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